संधारित्र की धारिता। धारिता का मात्रक। 1 फेरैड की परिभाषा। संधारित्र की धारिता की निर्भरता

संधारित्र की धारिता


हेलो! मित्रों आज हम संधारित्र की धरिता के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे। इस परिचर्चा में हम संधारित्र की धारिता क्या है? इसका मात्रक क्या है? 1 फेराड की परिभाषा और इसकी निर्भरता के बारे में परिचर्चा करेंगे?

इसके बारे मे जानकारी देने का प्रयत्न करेंगे।

यह विषय कक्षा 9,10,11,12 और स्नातक स्तर के लिए उपयोगी साबित होगा। आपकी सहायता हेतु हमने इस विषय को चुना है।

विषयवस्तु :-

1.संधारित्र की धारिता
2. संधारित्र की धारिता का मात्रक
3.एक फेरड की परिभाषा
4. संधारित्र की धारिता की निर्भरता

1. संधारित्र की धारिता:-

किसी ऐसे दो चालकों का युग्म है। जिस पर बराबर तथा विपरीत आवेश होता है संधारित्र की धारिता कहलाती है।

संधारित्र किसे कहते है? संधारित्र के प्रकार, संधारित्र का संयोजन

संधारित्र की एक प्लेट को दिए गए q आवेश तथा संधारित्र की दोनों प्लेटों के बीच उत्पन्न विभवांतर के अनुपात को उस चालक पर संधारित्र की धारिता कहते हैं।

संधारित्र की धारिता C = q/V

C= धारिता

V=विभवंतर

q=आवेश

कैपेसिटेंस का विमीय सूत्र [M⁻¹L⁻²T⁴A²]है।

2.संधारित्र की धारिता का SI मात्रक:-

धारिता का SI मात्रक कूलाम/वोल्ट है।

 इसे 'फैरड' कहते है तथा इसे F से निरुपित करते हैं। 

ये जानिए ताकि आपको बेहतर ढंग से समझ आ सके-

आवेश, आवेश के गुण,आवेश का क्वांटीकरण,आवेश का सूत्र

फैरड धारिता का बहुत बड़ा मात्रक है। अतः व्यवहार में सुविधा के लिए अन्य मात्रक, जैसे माइक्रो फैरड (μF) तथा पिको फेरेड (pF) अथवा नैनो फैरड (nF) प्रयुक्त करते हैं।

1 माइक्रो फैरड (μF) = 10⁻⁶ फैरड


 1 नैनो फैरड (nF) = 10⁻⁹ फैरड

1 पिको फैरड (pF) = 10⁻¹² फैरड

3. एक फैरड की परिभाषा:-

1 फैरड संधारित्र की वह धारिता है जो दो प्लेटो के मध्य एक वोल्ट का विभवांतर स्थापित करने पर 1 कूलॉम आवेश चार्ज कर लेता है।

                              [1 F =1q/1V]

4.संधारित्र की धारिता की निर्भरता –

किसी संधारित की धारिता निम्न कारकों पर निर्भर करती है –

1.प्लेट के क्षेत्रफल पर :- किसी संधारित्र की धारिता प्लेटो के क्षेत्रफल पर निर्भर करती है तथा क्षेत्रफल बढ़ाने पर संधारित्र की धारिता बढ़ जाती है। और यह इसके अनुक्रमानुपाती होती है।

                           अर्थात् C ∝ A 

2.प्लेटों के बीच की दूरी पर :- संधारित्र की धारिता प्लेटों के बीच की दूरी पर निर्भर करती है तथा दूरी बढ़ाने पर संधारित्र की धारिता घट जाती है। और यह इसके व्युत्क्रमानुपाती होती है।

                                 C∝1/d          जहां d=प्लेटों के बीच की दूरी

3.प्लेटो के माध्यम पर :- संधारित्र की धारिता दोनों प्लेटों के बीच के माध्यम पर निर्भर करती है तथा प्लेटों के बीच परावैद्युत माध्यम होने पर संधारित की धारिता बढ़ जाती है। और यह इसके अनुक्रमानुपाती होती है। 

                        अर्थात् C ∝K              जहां k=पराविद्युत माध्यम

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