आवेश, आवेश के गुण,आवेश का क्वांटीकरण,आवेश का सूत्र

 

आवेश का प्रदर्शन

हैलो! मित्रों आज हम आवेश के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे। इस परिचर्चा में हम आवेश क्या है? इसका मात्रक क्या है?आवेश का क्वांतिकरण कैसे होता है? और इसके कौन कौनसे गुणधर्म है?


इसके बारे मे जानकारी देने का प्रयत्न करेंगे।

यह विषय कक्षा 9,10,11,12 और स्नातक स्तर के लिए उपयोगी साबित होगा। आपकी सहायता हेतु हमने इस विषय को चुना है।

विषय वस्तु:-

1. आवेश क्या होता है?(what is charge?)


2.आवेश की प्रकृति व सूत्र (nature of charge& formula)
3.आवेश का इतिहास (history of charge)
4.आवेश के प्रकार (types of charge)
5.आवेश के गुणधर्म (properties of charge)
6.आवेश का क्वांतिकरण (quantization of charge)

1.आवेश क्या होता है?

किसी भी पदार्थ के निर्माण के लिए मूल कणो में से आवेश भी एक है , हालांकि आवेश की कोई निर्धारित परिभाषा (definition) नहीं है लेकिन आवेश को इसके द्वारा उत्पन्न प्रभावों के माध्यम से समझाया जाता है।

 आवेश एक द्रव्य(matter) पर उपस्थित वह गुण है जिसके कारण वह द्रव्य चुंबकीय क्षेत्र(megneticfield) उत्पन्न करता है या इन क्षेत्रों का अनुभव करता है। दूसरे शब्दों में हम कह सकते है कि द्रव्य कणों के साथ जुड़ी हुई वह आदिश राशि जो की विद्युत और चुंबकीय प्रभाव उत्पन करने के लिए जिमेदार होता है उसे आवेश कहते है।

उदाहरण :- 1. जब हम सर्दियों में अपनी स्वेटर को उतारते है तो हमें चट-चट की ध्वनि आवेश के कारण सुनाई देती है।

2. जब किसी प्लास्टिक स्केल को बालों से रगड़कर छोटे छोटे कागज के टुकड़ों के पास ले जाते है तो वे आपस मे चिपकने लगते है।

2.आवेश की प्रकृति व सूत्र (nature of charge&formula)

+ आवेश को अंग्रेजी वर्णमाला के q(क्यू) से निरूपित करते है।

+ यह एक आदिश राशि है। अर्थात् इसकी दिशा को निरूपित नहीं किया जा सकता है। (हम आपका doubt clear कर दे कि आवेश पर जो दिशा दिखाई जाती है वह विद्युत द्विध्रुव की होती है,जो की सदिश राशि है।)

सूत्र:- Q=I.t 

               जहां Q= विद्युत आवेश

                     I=विद्युत धारा

                    t= समय अंतराल 

अर्थात् किसी चालक में विद्युत धारा और समय अंतराल के गुणन फल को विद्युत आवेश कहते है।

इसका SI मात्रक कूलाम (Culamb) होता है।जिसे C(capital c) से दर्शाते है।

[1C=1A×1sec.]

CGS मात्रक --स्टेट कुलाम या फ्रेंकलिन 

1culamb=3×10^9 स्टेट कुलांब

1कुलांब आवेश = 3×10^9 esu आवेश

चूंकि 1 esu=1/10 emu 

जहां esu = electro static unit(स्थिर विद्युत आवेश)

     emu= electro megnetic unit(विद्युत चुम्बकीय आवेश)

3.आवेश का इतिहास ( history of charge)

लगभग 600 ईसा पूर्व ग्रीक देश के वैज्ञानिक थेल्स( thelas) ने पाया कि एम्बर (रेजिनी पदार्थ) को रेशेदार ऊन से रगड़ा जाता है। तो वह पदार्थ छोटे-छोटे कागज के टुकड़ों तथा तिनकों या भूसे के टुकड़े को अपनी ओर आकर्षित करता है। यद्यपि इस प्रयोग का खास महत्व नहीं था परंतु यह physics के लिए वरदान साबित हुआ।

एम्बर को ग्रीक भाषा में इलेक्ट्रॉन (इलेक्ट्रॉन) के नाम से जाना जाता है। इसी घटना के कारण विद्युतिकी (electricity) का अविष्कार हुआ। 

इसी तरह से एक अन्य वैज्ञानिक गिलबर्ट ने देखा कि एबोनाइट की छड़ को बिल्ली की खाल से तथा कांच की छड़ी को रेशम से रगड़ने पर यह छोटे-छोटे कागज के टुकड़ों या तिनकों को अपनी ओर आकर्षित कर लेते हैं। तो इन पदार्थों को आवेशित पदार्थ कहते हैं। 

पदार्थों द्वारा दूसरे हल्के पदार्थों को अपनी और आकर्षित करने का यह गुण घर्षण के कारण उत्पन्न होता है। अतः इस प्रभाव को घर्षण विद्युत प्रभाव कहते हैं। और ये आवेश एक जगह पर स्थिर रहते है। जिससे स्थिर विद्युतिकी भौतिकी विज्ञान का जन्म हुआ।

4. आवेश के प्रकार (types of charge)

आवेश मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं। 

1.धन आवेश 

2.ऋण आवेश

जब कोई दो वस्तुओं को आपस में रगड़ते हैं तो एक में ऋण आवेश तथा दूसरी में धन आवेश उत्पन्न होता है अर्थात दोनों वस्तुओं पर उत्पन्न आवेशों की प्रकृति एक दूसरे के विपरीत होती है।

उदाहरण- यदि काँच को रेशम के साथ रगड़ा जाय तो काँच में धन आवेश उत्पन्न होता है, लेकिन यदि काँच को रोआँ से रगडा जाय तो काँच में ऋण आवेश उत्पन्न होगा। 

सजातीय आवेशों में प्रतिकर्षण होता है अर्थात धन आवेशित वस्तुएँ एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करती है। और ऋण आवेशित वस्तुएँ भी एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करती है। विजातीय आवेशों में आकर्षण होता है अर्थात एक धन आवेशित वस्तु और एक ऋण आवेशित वस्तु में आकर्षण होता है।

नीचे दी गई सारणी में जो पहले आता है उसमे धन आवेश और जो बाद में स्थित है। उसमे ऋण आवेश उपस्थित होगा।

1.रोआ 2.फ्लैनल 3. चमड़ा 4.मोम 5.कांच 6.कागज 7.रेशम 8.मानव 9. शरीर 10.लकड़ी11. धातु12. रेजिन 13.अंबर 14.गंधक 15.इबोनाइट 

अर्थात् मोम को जब धातु सतह से रगडा जाता है तो मोम धनात्मक और धातु ऋणात्मक आवेशित होगा। जबकि मोम को चमड़े से रगड़ने पर चमड़ा धनात्मक और मोम ऋणात्मक आवेशित होगा।

 5. आवेश के गुणधर्म (properties of charge)

आवेश के गुणधर्म :- आवेश के निम्न गुणधर्म है। 

1.आवेश संरक्षण का नियम :- इस नियम के अनुसार आवेश को न तो पैदा किया जा सकता है और ना ही नष्ट किया जा सकता है अर्थात पूरा आवेश संरक्षित रहता है। पूरे विलगित निकाय में आवेश सदैव संरक्षित रहता है। 

2.विद्युत आवेश निर्देश तंत्र के चुनाव से स्वतंत्र होता है। अर्थात किसी वस्तु पर आवेश परिवर्तित नहीं होता है। 

3.किसी कण पर विद्युत आवेश का मान वेग पर निर्भर नहीं करता है। 

4.किसी निकाय पर कुल आवेश का मान उसमें उपस्थित सभी आवेशों के बीजगणितीय योग के बराबर होता है।

5. सजातीय आवेशों में रिपल्शन होता है। जबकि विजातीय आवेशो में आकर्षण होता है।

6. आवेशों की संख्या भिनात्मक न होकर पूर्ण गुणज के रूप में होती है।

7.आवेशों को वास्तविक संख्याओं की भाँति जोड़ा जा सकता है 
यदि किसी निकाय में n आवेश q1 , q2 , q3 , . . . . qn हैं तो निकाय का कुल आवेश q1 , q2 , q3 , . . . . qn है । आवेश का द्रव्यमान की भाँति ही परिमाण होता है , दिशा नहीं होती । किसी वस्तु का द्रव्यमान सदैव धनात्मक होता है जबकि कोई आवेश या तो धनात्मक हो सकता है अथवा ऋणात्मक 
उदाहरण के लिए , यदि किसी निकाय में + 3q , - 5q व + 7q आवेश है तो निकाय का कुल आवेश q = + 3q - 5q + 7q = + 5q होगा ।

 8.किसी भी विलगित तन्त्र में आवेश की कुल मात्र नियत रहती है । इसे आवेश संरक्षण का नियम कहते हैं । ”
यदि किसी विलगित निकाय के तन्त्र में दो पिण्ड पर आवेश q1 व q2 हैं एवं इनमें परस्पर अभिक्रिया के फलस्वरूप आवेश q3 व q4 हो जाते हैं तो आवेश संरक्षण के नियमानुसार तंत्र में कुल आवेश की मात्रा स्थिर रहनी चाहिए अतः
क्रिया से पूर्व आवेश = क्रिया के पश्चात् आवेश
             q1 + q2 = q4 + q5

6. आवेश का क्वांतिकरण (quantization of charge)

प्रत्येक आवेशित वस्तु ( छोटी अथवा बड़ी ) पर उपस्थित आवेश सदैव आवेश की एक न्यूनतम मात्रा का पूर्ण गुणक होता है । आवेश की इस न्यूनतम मात्रा को मूल आवेश ( Fundamental Charge ) कहते हैं तथा इसे e से प्रदर्शित करते हैं । 
सन् 1912 में वैज्ञानिक मिलीकॉन ने अपने प्रयोग द्वारा यह ज्ञात किया कि आवेश की यह न्यूनतम मात्रा e = 1.6 × 10-19 कूलॉम होती है । यह इलेक्ट्रॉन पर उपस्थित आवेश का ही परिमाण है । अतः प्रकृति में e से छोटा कोई आवेश नहीं है अतः किसी भी आवेशित वस्तु अथवा कण पर उपस्थित आवेश ज्ञात करें तो वह सदैव e , 2e , 3e , . . . . अथवा - e , - 2e , - 3e , . . . . ही होगा , e के भिन्न रूप में नहीं अर्थात् 0.7e , 3.5e , . . . . . 1.5e आदि नहीं । अत : इस तथ्य से स्पष्ट होता है कि 
“ किसी वैद्युत / आवेश को अनिश्चित रूप में विभाजित नहीं किया जा सकता है । आवेश का यह गुण आवेश की परमाणुकता (Atomicity of Charge ) कहा जाता है ।”
वैज्ञानिक मिलिकॉन ने मूल आवेश e को विद्युत का क्वान्टम कहा । इस गुण का कारण यह है कि वस्तुओं के वैद्युतीकरण में इलेक्ट्रॉन पूर्ण संख्या में ही एक वस्तु से दूसरी वस्तु में स्थानान्तरित हो सकते हैं , भिन्नात्मक रूप में नहीं ।

अतः आवेशित वस्तुओं पर वैद्युत आवेश सतत परिमाण में न होकर असतत विवक्त परिमाण में होता है । वैद्युत आवेश का यह गुण आवेश का क्वाण्टमीकरण कहलाता है ।

इसका अर्थ है कि किसी आवेशित वस्तु पर उपस्थित आवेश सदैव मूल आवेश ( e ) का पूर्ण गुणक होता है 

अर्थात् q = ne ( जहाँ पर n = ± 1 , ± 2 , ± 3 , . . . . )

हमे आशा है कि आपके लिए यह जानकारी उपयोगी साबित हुई होगी। इस प्रकार की अन्य जानकारी प्राप्त करने के लिए फॉलो करे।

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