विद्युत विभव क्या है vidhyut vibhav kya hai? मात्रक। विमा। विधुत आवेश के कारण विद्युत विभव

विद्युत विभव


हैलो! मित्रों आज हम विद्युत विभव के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे। इस परिचर्चा में हम विद्युत विभव  क्या है? इसका मात्रक क्या है? विद्युत विभव की विमा क्या है? और किसी बिन्दु पर विद्युत आवेश के कारण विद्युत विभव ।
इसके बारे मे जानकारी देने का प्रयत्न करेंगे।
यह विषय कक्षा 9,10,11,12 और स्नातक स्तर के लिए उपयोगी साबित होगा। आपकी सहायता हेतु हमने इस विषय को चुना है।

विषय वस्तु:-

1. विद्युत विभव
2.मात्रक एवं विमा
3.विद्युत विभव के प्रकार
4.विद्युत विभव के प्रकार
5.किसी बिन्दु पर विद्युत आवेश के कारण विद्युत विभव

1.विद्युत विभव:-  

अनन्त से इकाई धनावेश को विद्युत क्षेत्र में स्थित किसी बिन्दु तक लाने में जितना कार्य करना पड़ता है उसे उस बिन्दु का विद्युत विभव कहते हैं। (अनन्त पर विद्युत विभव शून्य माना जाता है)

विद्युत विभव एक अदिश राशि है। इसे V से व्यक्त करते हैं।

Note-इसे अच्छे से समझने हेतु यह जानना जरूरी है -

आवेश, आवेश के गुण,आवेश का क्वांटीकरण,आवेश का सूत्र

 विद्युत धारा।विद्युत धारा का SI मात्रक।विमीय सूत्र। दिशा।विद्युत धारा के प्रकार। मापन

2.मात्रक एवं विमा :-

विभव का एस आई (SI) मात्रक वोल्ट होता है।

C.G.S. मात्रक = e.s.u. या स्थैत वोल्ट 1 वोल्ट \300स्थैतिक वोल्ट 

विमाएँ:- [M¹L²T–³A–¹]

3.विद्युत विभव के प्रकार :- 

आवेश की प्रकृति के आधार पर विभव के दो प्रकार हैं।

धनात्मक विभव : धन आवेश के कारण

ऋणात्मक विभव : ऋण आवेश के कारण

4.किसी बिन्दु पर विद्युत आवेश के कारण विद्युत विभव :-

विभव की परिभाषानुसार किसी आवेश को उस बिंदु तक लाने में किया गया कार्य ही विद्युत विभव कहलाता है।

मान लीजिये कोई बिंदु O है जिस पर कोई आवेश +q रखा हुआ है , इस आवेश (q) अर्थात O बिन्दु से r दूरी पर एक बिंदु P स्थित है तथा हमें P बिंदु पर विभव का मान ज्ञात करना है या दूसरे शब्दों में कहे तो अनंत से एकांक धनावेश को P बिंदु तक लाने में किया गया कार्य ज्ञात करेंगे।

एकांक धन आवेश को अनंत से P बिन्दु तक लाने में किया गया कार्य अर्थात P बिंदु पर विद्युत विभव ज्ञात करने के लिए OP दिशा में O बिंदु से x दुरी पर एक बिंदु A चुन लेते है।

धन परीक्षण आवेश (q⁰) A बिंदु पर लगने वाला बल (कूलॉम नियम से )

                              F=1 /4πε₀ (qq⁰/x²)

इस बल (F) के विरुद्ध धन परिक्षण आवेश को dx विस्थापित करने में किया गया कार्य

                           dW = F.dx

                           dW = F.dx Cos180⁰

                           dW = F.dx (-1)

                           dW = -F.dx

अतः धन परिक्षण आवेश  (q⁰) को अनन्त से P बिंदु तक लाने में किया गया कार्य

धन परिक्षण आवेश  (q⁰) को अनन्त से P बिंदु तक लाने में किया गया कार्य


हम जानते है की विभव V = W

हम जानते है की विभव V = W/q

अतः P बिंदु पर विभव

               V = W/q⁰ =1/q⁰ ×1/4πε₀ (qq⁰/r)

               V= 1/4πε₀(q/r)

यदि आवेश धनात्मक है तो उसके कारण धनात्मक विभव उत्पन्न होगा और ऋणत्मक आवेश के कारण ऋणlत्मक विभव उत्पन्न होगा।

               V∝1/r

बिंदु आवेश के कारण विद्युत क्षेत्र -

               E= 1/4πε₀( q/r²)

               E∝1/r²

अतः यदि विद्युत विभव एवं विद्युत क्षेत्र को एक ही ग्राफ पर प्रदर्शित करें तो ग्राफ निम्न प्राप्त होगा।

विधुत विभव व विधुत क्षेत्र में संबंध ग्राफ


हमने O बिंदु पर धनात्मक q आवेश की कल्पना की है अतः विद्युत विभव भी धनात्मक है यदि यह आवेश ऋणात्मक होता तो विद्युत विभव का मान भी ऋणात्मक होता।

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                                सधन्यवाद...


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