विद्युत धारा।विद्युत धारा का SI मात्रक।विमीय सूत्र। दिशा।विद्युत धारा के प्रकार। मापन
इसके बारे मे जानकारी देने का प्रयत्न करेंगे।
यह विषय कक्षा 9,10,11,12 और स्नातक स्तर के लिए उपयोगी साबित होगा। आपकी सहायता हेतु हमने इस विषय को चुना है।
विषयवस्तु
1.विद्युत धारा किसे कहते है?
2. विद्युत धारा का SI मात्रक क्या है?
3. विद्युत धारा का विमीय सूत्र
4. विद्युत धारा की दिशा
5. विद्युत धारा के प्रकार
6.विद्युत धारा का मापन
1. विद्युत धारा किसे किसे कहते है?(what is electric current)
हम यह देखते हैं कि विद्युत धारा के बिना कुछ भी संभव नहीं है हमारे चारों ओर कार्य करने वाली यांत्रिक मशीनें और प्रकाश स्रोत सभी विद्युत धारा पर आधारित होते हैं इसलिए हम यह जानने की कोशिश करते हैं की विद्युत धारा क्या है?
सामान्यतः किसी चालक तार में से आवेश प्रवाह की दर को विद्युत धारा कहा जाता है। किसी चालक तार में इलेक्ट्रॉन के बहने को ही विद्युत धारा कहा जाता है।
बेजामिन फ्रैंकलिन ने सबसे पहले इस शब्द का प्रयोग किया था।
विद्युत धारा को I(आई) से निरूपित करते हैं।
2. विद्युत धारा का मात्रक
कि यदि कि यदि किसी चालक तार में से क्यों आवेश इसमें में प्रवाहित होता है तो बहने वाली
विद्युतधारा I= Q/t
विद्युत धारा=आवेश/समय
जहां -I=विद्युत धारा
Q=प्रवाहित आवेश
t= समंयातराल
विद्युत धारा का SI( एस. आई.) मात्रक एंपियर होता है जिसे A से निरूपित करते हैं।
1 एम्पियर की परिभाषा
1 एंपियर = एक कूलाम आवेश / 1 सेकंड
IA = 1 C/1Sec.
किसी चालक तार में से एक सेकंड में एक कूलाम आवेश प्रवाहित होता है दो बहने वाली धारा 1 एंपियर होगी।
3.विद्युत धारा का विमीय सूत्र
धारा की विमा = चूँकि यह मूल राशि है इसलिए इसकी विमा [A] होती है।
4. विद्युत धारा की दिशा
सामान्यतः हम जानते है कि किसी द्रव का प्रवाह है उस क्षेत्र से निम्न क्षेत्र की ओर होता है उसी प्रकार धारा का प्रवाह भी उच्च विभव क्षेत्र से निम्न विभव क्षेत्र की ओर होता है।
अतः हम कह सकते है की धन आवेश तथा धारा की दिशा एक ही होती है धन (+) वस्तु से ऋण (-) वस्तु की ओर।
ऋण आवेश का प्रवाह निम्न विभव से उच्च विभव की ओर होता है। अतः कह सकते है की ऋण आवेश (इलेक्ट्रॉन) का प्रवाह धारा की दिशा के विपरीत होता है।
निष्कर्ष - धारा का प्रवाह धनावेश की दिशा में।
या ऋण आवेश के विपरीत दिशा में।
विद्युत धारा सदिश राशि है या आदिश ?
कोई भी सदिश राशि सदिशो के योग के नियमों का पालन करती है जो कि नीचे दिया गया है
A+B=|A|+|B|+|A||B|cosθ
पर विद्युत धारा परिमाण और दिशा होने के बाद भी इस योग के नियम का पालन नहीं करती है अतः विद्युत धारा एक अदिश राशि है।
यद्यपि हम परिपथो में किसी तार की धारा को तीर के चिन्ह से प्रदर्शित करते हैं परंतु इससे यह नहीं समझना चाहिए कि धारा सदिश राशि है तीर का चिन्ह है केवल यह इंगित करता है कि तार में धन आवेश इस ओर प्रवाहित हो रहा है।
5.विद्युत धारा के प्रकार
विद्युत धारा मुख्यतः दो प्रकार की होती है।
1. दिष्ट धारा ( direct current)
2. प्रत्यावर्ती धारा ( alternating current)
1. दिष्ट धारा ( direct current) – वह धारा जिसकी दिशा और परिमाण दोनों समय के साथ अपरिवर्तित रहते हैं उसे दिष्ट धारा कहते हैं |
1. इस धारा की दिशा और परिमाण समय के साथ अपरिवर्तित रहते हैं|
2. इस धारा में ट्रांसफार्मर का उपयोग नहीं किया जा सकता है |
3. यह धारा चुंबकीय, रासायनिक और ऊष्मीय तीनों प्रभाव प्रदर्शित करती है |
4. इस धारा को मापने वाले उपकरण धारा के चुंबकीय प्रभाव पर आधारित होते हैं |
5. विद्युत चुंबक बनाने में इस धारा का उपयोग किया जाता है|
6. विद्युत लेपन में इस धारा का उपयोग किया जाता है |
7. यह धारा प्रत्यावर्ती धारा से कम खतरनाक होती है |
2. प्रत्यावर्ती धारा ( alternating current) – वह विद्युत धारा जिसका परिमाण एवं दिशा दोनों समय के साथ परिवर्तित होते रहते हैं प्रत्यावर्ती धारा कहलाती हैं|
1.इस धारा की दिशा और परिमाण दोनों समय के साथ परिवर्तित होते हैं |
2. इस धारा में ट्रांसफार्मर का उपयोग किया जा सकता है |
3. यह धारा चुंबकीय और रासायनिक प्रभाव प्रदर्शित नहीं करती है केवल उष्मीय प्रभाव प्रदर्शित करती है |
4. इस धारा को मापने वाले उपकरण धारा के उष्मीय प्रभाव पर आधारित होते हैं |
5. विद्युत चुंबक बनाने में इस धारा का उपयोग नहीं किया जा सकता है |
6. विद्युत लेपन में इस धारा का उपयोग नहीं किया जा सकता है|
7. समान वोल्टेज की प्रत्यावर्ती धारा दिष्ट धारा से अधिक खतरनाक होती है |
6.धारा को कैसे मापते है?
विद्युत धारा की मात्रा मापने का यंत्र एमीटर है। विद्युत धारा को मापने के लिए इस्तेमाल में लाया जाने वाला यंत्र वास्तव में एम्प मीटर का एक छोटा रूप एमीटर होता है। विद्युत धारा ऐम्पियर में मापा जाता है। वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं में बहुत छोटी विद्युत धाराओं को मापने के लिए बेहद संवेदनशील यंत्र 'गैल्वेनोमीटर' का प्रयोग होता है।
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